सूती धागों की तैयारी, ब्लीचिंग और रंगाई की पारंपरिक विधियाँ
किसी भी सूती धागे को रंगने से पहले उसकी उचित तैयारी बहुत आवश्यक होती है। कोरे सूत को सीधे रंगाई में डाल देना उचित नहीं माना जाता, क्योंकि उसमें प्राकृतिक अशुद्धियाँ रहती हैं। इनमें मोम, वनस्पति के छोटे टुकड़े, चर्बी तथा अन्य अशुद्ध पदार्थ शामिल हो सकते हैं। यदि इन अशुद्धियों को पहले दूर न किया जाए, तो रंगाई असमान हो सकती है, रंग ठीक से नहीं चढ़ता और धागे पर धब्बे भी पड़ सकते हैं।
इसलिए रंगाई से पहले सूत को गर्म क्षारीय घोल में उबालना, आवश्यकता होने पर ब्लीच करना और फिर उचित विधि से रंगना आवश्यक माना गया है। नीचे सूती धागों की तैयारी से लेकर डाइरेक्ट और वैट रंगों से रंगाई तक की विधियाँ दी जा रही हैं।
1. धागों को उबालना
कोरे सूती धागे को रंगने से पहले उबालना चाहिए। यह प्रक्रिया धागे की अशुद्धियों को हटाने में सहायता करती है और धागे को रंग ग्रहण करने योग्य बनाती है। कोरे सूत में उपस्थित मोम, चिकनाई, वनस्पति अवशेष और अन्य प्राकृतिक अशुद्धियाँ रंगाई की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती हैं।
पाँच किलोग्राम सूत को उबालने के लिए निम्न घोल तैयार किया जाता है:
| सामग्री | मात्रा |
|---|---|
| कास्टिक सोडा ठोस | 100 ग्राम |
| साबुन | 50 ग्राम |
| सोडियम सिलिकेट | 50 ग्राम |
| पानी | 100 लीटर |
इस घोल में सूत को 4 से 5 घंटे तक उबालें। रंगाई में मृदु जल का प्रयोग करना चाहिए। कठोर जल के इस्तेमाल से रसायनों की खपत अधिक होती है और रंगाई में धब्बे पड़ सकते हैं। सूत को एक रात के लिए घोल में डुबोकर रखना चाहिए और अगले दिन साफ पानी से अच्छी तरह धो लेना चाहिए। यह विधि सामान्यतः सभी प्रकार के सूत के लिए उपयुक्त मानी जाती है।
2. विरंजन या ब्लीचिंग
सफेद सूत या हल्के रंगों की रंगाई के लिए सूत का ब्लीचिंग करना आवश्यक होता है। ब्लीचिंग द्वारा सूत के प्राकृतिक रंग को हटाया जाता है, जिससे उस पर हल्के या चमकदार रंग अधिक अच्छे ढंग से चढ़ते हैं।
ब्लीचिंग की मुख्यतः दो विधियाँ हैं:
- हाइपोक्लोराइट विधि
- हाइड्रोजन परॉक्साइड विधि
3. ब्लीचिंग पाउडर विधि
इस विधि में सामान्यतः ब्लीचिंग पाउडर का प्रयोग किया जाता है। अर्ध-ब्लीच किया हुआ सूत रंगाई के लिए अच्छा माना जाता है। उबले हुए सूत को 1 से 1.5 ग्राम प्रति लीटर उपलब्ध क्लोरीन वाले ब्लीचिंग घोल में सामान्य तापमान पर लगभग आधा घंटा चलाया जाता है।
इसके बाद सूत को धोकर 5 से 10 मिलीलीटर प्रति लीटर नमक के अम्ल के घोल में सामान्य तापमान पर लगभग आधा घंटा रखा जाता है। फिर धागे को अच्छी तरह पानी से धोया जाता है, ताकि अम्ल पूरी तरह निकल जाए।
पूर्ण सफेदी प्राप्त करने के लिए 5 किलोग्राम सूती धागे हेतु लगभग 700 ग्राम ताजा ब्लीचिंग पाउडर को 100 लीटर पानी में घोलकर ब्लीचिंग घोल तैयार किया जाता है। ब्लीच करने के बाद धुलाई की जाती है, फिर अम्ल के घोल से धुलाई और अंत में साफ पानी से अच्छी तरह धुलाई की जाती है।
सफेदी बढ़ाने के लिए टिनोपाल, खूबी व्हाइट या अमरव्हाइट को \(0.1\%\) से \(0.2\%\) के घोल में प्रयोग किया जा सकता है। इसके बाद सूत को निचोड़कर बिना धुलाई किए सुखाया जाता है।
ब्लीचिंग करते समय सावधानियाँ
- ब्लीचिंग के समय धातु के बर्तन का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
- ब्लीचिंग के लिए ताजा घोल उसी समय तैयार करना चाहिए।
- ब्लीचिंग करते समय धागे पर सूर्य की सीधी किरणें नहीं पड़नी चाहिए।
- क्लोरीन की मात्रा बताई गई मात्रा के अनुसार ही होनी चाहिए।
4. हाइड्रोजन परॉक्साइड विधि
हाइड्रोजन परॉक्साइड विधि को अधिक सुरक्षित और उत्तम माना जाता है, क्योंकि इससे रेशों और पर्यावरण को अपेक्षाकृत कम नुकसान होता है। बाजार में सामान्यतः 10, 20, 100 और 130 आयतन शक्ति वाला हाइड्रोजन परॉक्साइड मिलता है।
हाइड्रोजन परॉक्साइड की आयतन शक्ति और वजन प्रतिशत का संबंध इस प्रकार है:
| हाइड्रोजन परॉक्साइड की शक्ति | वजन अनुसार प्रतिशत शुद्धता |
|---|---|
| 10 आयतन | 3.04% |
| 20 आयतन | 6.08% |
| 100 आयतन | 30.40% |
| 130 आयतन | 39.52% |
हाइड्रोजन परॉक्साइड से ब्लीच करते समय सामान्यतः सोडियम सिलिकेट का प्रयोग किया जाता है। तापमान लगभग \(80^\circ C\) से \(85^\circ C\) रखा जाता है।
| सामग्री | अर्ध-ब्लीच | पूर्ण-ब्लीच |
|---|---|---|
| हाइड्रोजन परॉक्साइड | 0.5 से 1 आयतन | 2 से 4 आयतन |
| सोडियम सिलिकेट | 2 ग्राम प्रति लीटर | 8 ग्राम प्रति लीटर |
| ब्लीचिंग समय | लगभग 2 घंटे | लगभग 2 घंटे |
उदाहरण के लिए, 5 किलोग्राम सूती धागे को पूर्ण ब्लीच करने के लिए 2 आयतन हाइड्रोजन परॉक्साइड और 4 ग्राम प्रति लीटर सोडियम सिलिकेट लिया जा सकता है। 100 लीटर पानी में 400 ग्राम सोडियम सिलिकेट और लगभग 1.560 लीटर हाइड्रोजन परॉक्साइड मिलाकर घोल तैयार करें। तापमान \(80^\circ C\) तक बढ़ाएँ और इस तैयार घोल में सूत को लगभग 2 घंटे चलाएँ। फिर धुलाई करके निचोड़ लें और सूत को सुखा लें।
5. डाइरेक्ट रंगों से रंगाई
डाइरेक्ट रंगों से रंगाई सूती धागे पर अपेक्षाकृत सरल विधि से की जा सकती है। रंग को घोलते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि रंग ठीक से घुल जाए और उसमें अवशेष या दाने न रहें।
रंग घोलने की विधि
रंग को मृदु जल या मृदु किए हुए जल में घोलना चाहिए। पहले थोड़े ठंडे पानी में रंग का चिकना पेस्ट बनाया जाता है। इसके बाद उसमें पर्याप्त मात्रा में उबलता हुआ गर्म पानी मिलाया जाता है और लगातार चलाया जाता है। घोल को पूरी तरह घुलने तक उबालना चाहिए।
रंगाई पात्र में धागे के वजन के अनुसार निम्न रसायन मिलाए जाते हैं:
| रसायन | हल्के शेड में | मध्यम शेड में | गहरे शेड में |
|---|---|---|---|
| सोडा ऐश | 0.5% | 1% | 2% |
| ग्लोबर साल्ट या साधारण नमक | 5% | 10% से 15% | 20% से 30% |
रंगाई के लिए \(40^\circ C\) से \(50^\circ C\) तापमान पर आवश्यक मात्रा में सोडा ऐश और आवश्यक मात्रा का आधा नमक धागे के 20 गुना पानी में मिलाकर रंगाई पात्र तैयार किया जाता है। पहले से उबाले या ब्लीच किए हुए सूती धागों को इस पात्र में डालकर लगभग 15 मिनट चलाया जाता है।
इसके बाद बचा हुआ आधा नमक रंगाई पात्र में डालकर लगभग 15 मिनट में तापमान धीरे-धीरे \(90^\circ C\) से \(95^\circ C\) तक बढ़ाया जाता है। इसी तापमान पर 35 से 45 मिनट तक रंगाई की जाती है।
गहरे शेड की रंगाई करते समय यह सलाह दी जाती है कि धागे को लगभग 15 मिनट तक रंगाई पात्र में ही रहने दिया जाए, जब तक पात्र थोड़ा ठंडा न हो जाए। अंत में सूती धागे को बाहर निकालकर निचोड़ लें और फिर सादे पानी में अच्छी तरह धो लें।
डाइरेक्ट रंगों से रंगाई की सावधानियाँ
- रंगाई करते समय धागे को अच्छी तरह चलाते रहना चाहिए।
- रंगाई सामान्य तापमान पर शुरू करनी चाहिए।
- तापमान धीरे-धीरे \(60^\circ C\) से \(90^\circ C\) तक बढ़ाना चाहिए।
- समान रंगाई के लिए लेवलिंग एजेंट जैसे सैरोपोर आर.एस.डी. को 1% की मात्रा में कपड़े या धागे के वजन के अनुसार शुरुआत में रंगाई पात्र में मिलाया जा सकता है।
6. डाइरेक्ट रंगों का धुलाई पक्कापन बढ़ाना
रंगे हुए धागे या कपड़े को 5% क्रोमियम एसीटेट के घोल में 30 मिनट तक डुबोकर रखने से धुलाई के प्रति पक्कापन सुधर सकता है।
एक अन्य विधि में 1 से 2 ग्राम प्रति लीटर डाइफिक्सर के घोल में सामान्य तापमान पर उपचार किया जाता है। यह विधि सरल और कम लागत वाली मानी जाती है।
7. धूप के प्रति पक्कापन बढ़ाना
नीला थोथा अर्थात कॉपर सल्फेट के 1 ग्राम प्रति लीटर घोल में सामान्य तापमान पर 15 मिनट तक उपचार करने से कपड़े पर कीट प्रकोप कम होता है और धूप के प्रति पक्कापन भी बढ़ता है। रंगे हुए धागे को छाँव में सुखाना उचित रहता है।
8. वैट रंगों से रंगाई
जब बहुत अधिक पक्के शेड की आवश्यकता होती है, तब वैट रंगों का प्रयोग किया जाता है। पक्के रंगों की श्रेणी में वैट रंगों को श्रेष्ठ माना जाता है। ये रंग पानी में अघुलनशील होते हैं, लेकिन कॉस्टिक सोडा और रंगकाट यानी हाइड्रोसल्फाइट ऑफ सोडा मिलाने से घुलनशील अवस्था में आ जाते हैं।
यदि रंगाई पात्र में रंग के अनुसार कॉस्टिक सोडा और रंगकाट उचित मात्रा में न मिलाए जाएँ, तो वैट रंग अवक्षेपित होकर तलछट बन सकता है। इसलिए रंगाई पात्र में रंग घुलनशील अवस्था में रहना चाहिए।
रंगाई से पहले यह जाँच लेना चाहिए कि रंग पूरी तरह घुल गया है। इसकी जाँच दो प्रकार के टेस्टिंग पेपर से की जाती है:
- फिनॉफ्थलीन कागज: कॉस्टिक सोडा के घोल से लाल हो जाता है।
- वैट का पीला कागज: रंगकाट के घोल में नीला हो जाता है।
यदि जाँच से पता चले कि रंगाई पात्र में कॉस्टिक सोडा या रंगकाट कम है, तो थोड़ी और मात्रा में ये रसायन मिला लेने चाहिए। ऐसा न करने पर हल्का शेड, दागी रंगाई और पक्केपन में कमी आ सकती है।
9. वैट रंगों की प्रचलित विधि
आवश्यक मात्रा में रंग लेकर टर्की रेड ऑयल में उसका पेस्ट बनाया जाता है। फिर अवकरण या वैटिंग के लिए आवश्यक मात्रा में गर्म पानी, कास्टिक सोडा और रंगकाट मिलाया जाता है।
इसके बाद निर्धारित तापमान पर रंगाई पात्र तैयार किया जाता है। उसमें आवश्यक मात्रा में पानी, कॉस्टिक सोडा और रंगकाट मिलाया जाता है। अवकरण किया हुआ रंग इस रंगाई पात्र में मिलाया जाता है। सूती धागे को इसमें 45 मिनट से 1 घंटे तक अच्छी तरह चलाया जाता है।
इसके बाद धागे को बाहर निकालकर निचोड़ लें और लगभग 30 मिनट तक रंग का ऑक्सीकरण होने के लिए हवा में फैला दें। कुछ रंगों, जैसे नीले शेड, में रंगाई के तुरंत बाद और ऑक्सीकरण से पहले धुलाई की जाती है। कुछ रंगों में ऑक्सीकरण और धुलाई के बाद धागे को नूरने के लिए धूप से बचाया जाता है।
रंगाई किए हुए धागे पर रंग का हवा में ऑक्सीकरण होने के बाद पानी से धुलाई करें। फिर गंधक के तेजाब, 168 डिग्री ट्वेडल शक्ति, के 2.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी के घोल से धुलाई करें। इसके बाद साफ पानी से धो लें। तेजाब के पानी से धुलाई का काम सीमेंट या लकड़ी के बर्तन में करना चाहिए।
फिर रंगे हुए सूती धागों को 2 ग्राम साबुन और 1 ग्राम सोडा ऐश प्रति लीटर पानी के घोल में लगभग 30 मिनट तक सोपिंग करें। रंग का वास्तविक शेड और चमक उभारने के लिए पूरी तरह न चढ़े हुए रंग को निकालना आवश्यक होता है। इसके लिए सोपिंग अर्थात साबुन के घोल में उबालना बहुत महत्वपूर्ण है। इससे शेड का पक्कापन भी बढ़ता है।
10. वैट रंगों से रंगाई की पाँच विधियाँ
वैट रंगों से रंगाई की पाँच विधियाँ मानी जाती हैं। इन विधियों में रसायनों की मात्रा और तापमान में अंतर होता है।
विधि संख्या 1: इस विधि में कॉस्टिक सोडा और तापमान अधिक होता है। रंगाई पात्र में नमक नहीं मिलाया जाता।
विधि संख्या 2: इस विधि में मध्यम मात्रा में कॉस्टिक सोडा और मध्यम रंगाई ताप होता है। इसमें बहुत थोड़ी मात्रा में नमक का प्रयोग किया जाता है।
विधि संख्या 3: इस विधि में कम से मध्यम मात्रा में कॉस्टिक सोडा और कम रंगाई ताप पर अधिक मात्रा में नमक का प्रयोग किया जाता है।
विधि संख्या 4: इस विधि में विधि संख्या 1 की अपेक्षा अधिक मात्रा में कॉस्टिक सोडा और रंगकाट यानी हाइड्रो का प्रयोग किया जाता है।
विधि संख्या 5: इस विधि को स्टॉक वैट रंगाई विधि कहा जाता है। इसमें कॉस्टिक सोडा और रंगकाट अलग से रंगाई पात्र में नहीं मिलाया जाता।
रसायनों की मात्रा शेड की गहराई और विधि के अनुसार अलग-अलग होती है। सामान्य रूप से हल्के शेड, मध्यम शेड और गहरे शेड के लिए कॉस्टिक सोडा, रंगकाट और नमक या ग्लोबर साल्ट की मात्रा अलग-अलग रखी जाती है। रंगाई का तापमान भी विधि के अनुसार लगभग \(25^\circ C\) से \(80^\circ C\) तक बदल सकता है।
11. वैट रंगाई में रसायनों की सामान्य मात्रा
| रसायन | शेड की गहराई | विधि 1 | विधि 2 | विधि 3 | विधि 4 | विधि 5 |
|---|---|---|---|---|---|---|
| कास्टिक सोडा ठोस | हल्का शेड 0.5% तक | 425 | 175 | 140 | 600 | 165 |
| कास्टिक सोडा ठोस | मध्यम शेड 0.5–2% तक | 480 | 225–275 | 225 | 1100–1300 | 175 |
| कास्टिक सोडा ठोस | गहरा शेड 2% से अधिक | 550–600 | 275–350 | 300 | 1100–1300 | 200 |
| रंगकाट / हाइड्रो | हल्का शेड 0.5% तक | 175–225 | 175–225 | 175–225 | 350 | 170–180 |
| रंगकाट / हाइड्रो | मध्यम शेड 0.5–2% तक | 225–350 | 225–350 | 225–350 | 700–800 | 285 |
| रंगकाट / हाइड्रो | गहरा शेड 2% से अधिक | 350–450 | 350–450 | 350–450 | 700–800 | 350 |
| नमक / ग्लोबर साल्ट | हल्का शेड 0.5% | — | 225 | 450 | — | — |
| नमक / ग्लोबर साल्ट | मध्यम शेड 0.5–2% तक | — | 450–900 | 700–1400 | 1400 | — |
| नमक / ग्लोबर साल्ट | गहरा शेड 2% से अधिक | — | 1150–1850 | 1850–2700 | 2700 | — |
| रंगाई तापमान | — | 50–60°C | 40–50°C | 25–30°C | 60–80°C | 55–60°C |
निष्कर्ष
सूती धागे की सफल रंगाई केवल रंग डालने की प्रक्रिया नहीं है। यह एक क्रमबद्ध तकनीकी प्रक्रिया है, जिसमें पहले धागे की अशुद्धियों को हटाया जाता है, फिर आवश्यकता अनुसार ब्लीचिंग की जाती है और उसके बाद उपयुक्त रंगाई विधि अपनाई जाती है। डाइरेक्ट रंगों से रंगाई सरल है, लेकिन वैट रंगों से रंगाई अधिक पक्कापन देती है।
वैट रंगों में रसायनों की सही मात्रा, तापमान, अवकरण, ऑक्सीकरण और सोपिंग का विशेष महत्व होता है। पुरानी वस्त्र-प्रक्रियाओं में जो सूक्ष्मता दिखाई देती है, वह आज भी उपयोगी है। चाहे धागे को उबालना हो, ब्लीच करना हो, रंग घोलना हो या रंगाई के बाद पक्कापन बढ़ाना हो—हर चरण धागे की अंतिम गुणवत्ता को प्रभावित करता है।
सामान्य सुरक्षा अस्वीकरण
यह लेख पारंपरिक वस्त्र-प्रक्रिया संबंधी शैक्षिक जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें कास्टिक सोडा, अम्ल, ब्लीचिंग पाउडर, हाइड्रोजन परॉक्साइड, क्रोमियम एसीटेट, कॉपर सल्फेट और अन्य रसायनों का उल्लेख है। इन रसायनों का प्रयोग केवल प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा उचित सुरक्षा उपकरणों, वेंटिलेशन, माप-नियंत्रण और स्थानीय सुरक्षा नियमों के अनुसार ही किया जाना चाहिए।
घरेलू स्तर पर या बिना प्रशिक्षण के इन रसायनों का प्रयोग जोखिमपूर्ण हो सकता है। वास्तविक औद्योगिक प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। लेखक इस जानकारी के प्रत्यक्ष प्रयोग से होने वाले किसी नुकसान, दुर्घटना या गुणवत्ता संबंधी समस्या के लिए उत्तरदायी नहीं है।

